प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं
बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएं (एमवीआरपी) बांधों, जलाशयों और अन्य जल नियंत्रण संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से नदी घाटियों के जल और भूमि संसाधनों का एकीकृत विकास है। एमवीआरपी को सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जल विद्युत उत्पादन, नेविगेशन, मनोरंजन और जल आपूर्ति सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएं (एमवीआरपी) के मुख्य उद्देश्य:
- सिंचाई: एमवीआरपी सूखे के क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादन में वृद्धि कर सकता है।
- बाढ़ नियंत्रण: एमवीआरपी बाढ़ के पानी को जलाशयों में संग्रहित करके बाढ़ के नुकसान को कम कर सकता है।
- जल विद्युत उत्पादन: एमवीआरपी जल विद्युत, एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत उत्पन्न कर सकता है।
- नेविगेशन: एमवीआरपी नदियों को नेविगेशन के लिए अधिक सुगम बना सकता है, जिससे व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिल सकता है।
- मनोरंजन: एमवीआरपी मनोरंजन के अवसर प्रदान कर सकता है, जैसे मछली पकड़ना, नौका विहार और तैराकी।
- जल आपूर्ति: एमवीआरपी घरेलू, औद्योगिक और कृषि उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति प्रदान कर सकता है।
1. नर्मदा नदी घाटी परियोजना
नर्मदा भारत की पांचवीं सबसे बड़ी नदी है। सर्वप्रथम वर्ष 1945-46 में नर्मदा बेसिन में सिंचाई, विद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण हेतु एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार हुई थी। इस परियोजना के अंतर्गत 30 बड़ी, जिसमें से 10 नर्मदा नदी पर और 20 उसकी सहायक नदियों पर, 135 मध्यम तथा 3000 छोटे बांध तथा बैराज बनाए जाने की घोषणा की गई थी। ‘सरदार सरोवर परियोजना’ का निर्माण गुजरात राज्य में नर्मदा नदी पर (नवगांव के पास आधार तल से 163 मी. ऊंचे बांध से ) किया गया है। इसका पूर्ण जलाशय स्तर ( FRL) 138.68 मी. (455 फीट) है। इससे कुल 1450 मेगावॉट जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकेगा। सरदार सरोवर बांध से नर्मदा नदी के जल का 65.18 प्रतिशत (18.25 नि. एकड़ फीट) हिस्सा मध्य प्रदेश को प्राप्त होता है, जबकि गुजरात को 32.14 प्रतिशत (9 मि. एकड़ फीट) प्राप्त हो रहा है।
परियोजना से उत्पादित विद्युत में से सर्वाधिक 57 प्रतिशत विद्युत की आपूर्ति मध्य प्रदेश को तथा इसके बाद महाराष्ट्र को (27%) की जा रही है। अतः सरदार सरोवर से मध्य प्रदेश को सर्वाधिक लाभ मिलता है। सरदार सरोवर परियोजना से लाभान्वित होने वाले राज्यों में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश शामिल हैं। सरदार सरोवर परियोजना का विरोध करने के उद्देश्य से ही फरवरी, 1986 में समाज विज्ञानी मेधा पाटकर ने महाराष्ट्र के धुले जिले में नर्मदा धारणग्रस्त समिति की स्थापना की थी। वर्ष 1989 में अनेक स्थानीय संगठनों के विलय के साथ इसी संगठन का नामकरण नर्मदा बचाओ आंदोलन (N.B.A.) किया गया।
नर्मदा सागर परियोजना को इंदिरा सागर बांध भी कहते हैं। इंदिरा सागर परियोजना नर्मदा नदी पर मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले में पुनासा गांव से 10 किमी. की दूरी पर स्थित है। इंदिरा सागर परियोजना 1000 मेगावॉट की स्थापित क्षमता के साथ एक बहुउद्देशीय परियोजना है और 1.23 लाख हेक्टेयर के कृषि योग्य कमान क्षेत्र पर 2.65 की वार्षिक सिंचाई शामिल है। नर्मदा घाटी में तवा, वारना, कोलार, सूक्ता, मटयारी नान प्रोजेक्ट और शहीद चंद्रशेखर आजाद (जोबट ) परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। इन परियोजनाओं से 3 लाख 98 हजार 3 सौ हेक्टेयर सिंचाई क्षमता अर्जित कर ली गई है। तवा परियोजना से 13.50 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। नर्मदा की सहायक नदी मान पर मान परियोजना, तुथनी नदी पर शहीद चंद्रशेखर आजाद ( जोबट ) परियोजना, वेदा नदी पर अपर वेदा परियोजना का निर्माण किया गया है।
2. भाखड़ा-नांगल बांध परियोजना
भाखड़ा नांगल बहुउद्देश्यीय परियोजना पंजाब, हरियाणा और राजस्थान राज्यों का संयुक्त उपक्रम है। इसके अंतर्गत भाखड़ा और नांगल के पास सतलज नदी पर दो बांधों का निर्माण किया गया है। भाखड़ा बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1963 में पूरा हुआ। यह बांध सतलज नदी पर बनाया गया है। भाखड़ा बांध के जलाशय को ‘गोविंद सागर’ के नाम से जाना जाता है। भाखड़ा नांगल बांध का कमांड क्षेत्र हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में विस्तारित है।
3. कावेरी नदी घाटी परियोजना
जलविद्युत का विकास 19वीं शताब्दी के अंतिम दशक में शुरू हुआ। 1897 ई. में दार्जिलिंग नगर को बिजली आपूर्ति के लिए सिद्रापोंग (Sidrapong) में जलविद्युत संयंत्र लगाया गया था। यह भारत का सबसे पुराना जलविद्युत शक्ति संयंत्र है। कर्नाटक में कावेरी पर स्थित शिवसमुद्रम में वर्ष 1902 में भारत का दूसरा सबसे पुराना जलविद्युत उत्पादन संयंत्र लगाया गया। कृष्णराज सागर बांध कर्नाटक में कावेरी नदी पर स्थित है। कृष्णराज सागर बांध की रूपरेखा एम. विश्वेश्वरैय्या ने बनाया था। कृष्णराज सागर बांध के पास वृंदावन उद्यान स्थित है।
कावेरी नदी जल विवाद नें सम्मिलित राज्य हैं- तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल एवं पुडुचेरी । वर्ष 2018 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार, कावेरी नदी जल की कुल 740 (726 + 14) टी एन सी (TMC: Thousand Million Cubic) फीट विश्वसनीय मात्रा से कर्नाटक को 284.75 (270 + 14.75) TMC फीट, केरल को 30 TMC फीट, तमिलनाडु को 404.25 (419 – 14.75) TMC फीट एवं पुडुचेरी को 7 IMC फीट जल आवंटित किया गया है।
4. नागार्जुन सागर बांध परियोजना
नागार्जुन सागर बहु-उद्देश्यीय परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित है। यह परियोजना वर्ष 1967 में पूरी हुई थी। यह परियोजना आंध्र प्रदेश एवं नवगठित तेलंगाना दोनों राज्यों में विस्तारित है। यह तेलंगाना के नलगोंडा जिले और आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के मध्य निर्मित है। इस परियोजना के माध्यम से नलगोंडा, प्रकाशन, खम्मम और गुंटूर जिलों में सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध होती है। नागार्जुन सागर बांध की ऊंचाई लगभग 125 मीटर है। नागार्जुन सागर बांध के जलाशय में 11472 मिलियन क्यूबिक नीटर पानी भंडारण की क्षमता है। इस परियोजना के तहत लगभग 1450 मीटर लंबा एक चिनाई बांध (Masonry Dam) बनाया गया है। यह विश्व का सबसे बड़ा एवं सबसे ऊंचा चिनाई (Masonry) बांध है। बांध की कुल लंबाई 15956 फीट (4863 मी.) है।
5. हीराकुड बांध परियोजना
हीराकुड बांध ओडिशा राज्य में महानदी पर बनाई गई बहुद्देशीय परियोजना है। इस परियोजना का निर्माण वर्ष 1948 में शुरू हुआ और वर्ष 1957 में पूरा हुआ। हीराकुड बांध संबलपुर से 15 किमी. उत्तर में लगभग 61 मी. (200 फीट) ऊंचा एवं 4801 मी. (मुख्य बांध लंबाई) लंबा विश्व का सबसे लंबा बांध है। इस बांध की कुल लंबाई 25.8 किमी. (Earth dam) है। इस बांध से लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई भी की जा रही है।
6. चंबल नदी घाटी परियोजना
चंबल नदी मध्य प्रदेश के महू के समीप विंध्यन श्रेणी के जानापॉव पहाड़ी से निकलती है। इटावा के समीप यह यमुना में मिलती है। चंबल नदी पर निर्मित चंबल परियोजना राजस्थान एवं मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इस परियोजना के अंतर्गत गांधी सागर बांध (मध्य प्रदेश), राणा प्रताप सागर बांध एवं जवाहर सागर बांध (राजस्थान) निर्मित किए गए हैं। गांधी सागर बांध चंबल घाटी की 4 परियोजनाओं में से प्रथम परियोजना है। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित यह बांध 62.17 मीटर ऊंचा है। इस बांध का शिलान्यास वर्ष 1954 में हुआ तथा निर्माण कार्य वर्ष 1957 में प्रारंभ होकर नवंबर, 1960 में पूरा हुआ। राणा प्रताप सागर बांध राजस्थान राज्य में स्थित है। राजस्थान राज्य में कोटा से 30 किमी. दूर जवाहर सागर बांध का निर्माण किया गया है।
7. टिहरी बांध परियोजना
टिहरी बांध परियोजना का निर्माण भागीरथी (गंगा) नदी पर भागीरथी और भिलांगना के संगम के थोड़ा आगे उत्तराखंड के टिहरी जिले में किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भागीरथी एवं भिलांगना नदियों का अतिरिक्त जल संग्रह कर सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण एवं विद्युत उत्पादन करना है। इस परियोजना को योजना आयोग की स्वीकृति वर्ष 1972 में ही प्राप्त हो गई थी, किंतु निर्माण कार्य वर्ष 1978 से प्रारंभ हुआ। इस परियोजना के लिए टिहरी जलविद्युत विकास निगम (THDC) की स्थापना की गई है।टिहरी बांध देश का सबसे ऊंचा बांध (260.5 मी.) है। टिहरी बांध परियोजना के विरोध के मुख्य कारण इसकी भूकंप प्रवण क्षेत्र में स्थिति एवं पर्यावरण को क्षति और लोगों के विस्थापन से जुड़े हैं।
8. दामोदर नदी घाटी परियोजनाएं
दामोदर नदी हुगली की प्रमुख सहायक नदी है। दामोदर नदी में आने वाले बाढ़ एवं प्रदूषण के कारण इसे ‘बंगाल का शोक‘ कहा जाता था। इस परियोजना की रूपरेखा संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना के आधार पर की गई थी। दामोदर घाटी निगम की स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी। मैथॉन, बेलपहाड़ी और तिलैया बांधों का निर्माण दामोदर की सहायक नदी बराकर पर दानोदर नदी घाटी परियोजना के प्रथम चरण में किया गया है। दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत तिलैया बांध कोडरमा जिले में बराकर नदी पर बनाया गया है। इसका निर्माण कार्य वर्ष 1953 में पूरा हुआ।
कोनार बांध, कोनार नदी पर हजारीबाग जिले में दामोदर के संगम से 24 किमी. पूर्व में स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1955 में हुआ था। मैथॉन बांध बराकर नदी पर झारखंड के धनबाद जिले में बनाया गया है। मैथॉन बांध का निर्माण वर्ष 1957 पूरा किया गया। पंचेत हिल बांध दामोदर नदी पर मैथॉन बांध से 20 किमी. दक्षिण में धनबाद जिले (झारखंड) में स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1959 में पूरा हुआ। दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत दुर्गापुर बैराज से दो नहरें निकाली गई हैं I इन नहरों से वर्द्धमान, हुगली और हावडा जिलों की भूमि सिंचित होती है।
9. अन्य नदी घाटी परियोजनाएं
भारत में बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं से सिंचाई की सुविधा के अलावा बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, जलविद्युत उत्पादन, नहर, परिवहन और पर्यटन जैसे अनेक कार्य किए जा सकते हैं। भारत में जल विद्युत संयंत्र की स्थापना सर्वप्रथम 1897 ई. में प. बंगाल के दार्जिलिंग के निकट सिद्रापोंग अथवा सिद्राबाग में हुई थी। भारत और भूटान के सहयोग से चूका (Chukha) बांध परियोजना का निर्माण किया गया है। चूका बांध परियोजना भूटान में वांग चू अथवा रैदक नदी की धारा के ऊपरी भाग पर स्थित है। इस बांध की ऊंचाई 40 मीटर है। वर्ष 1974 में इसका निर्माण कार्य भारत सरकार की पूर्ण वित्तपोषित इकाई के रूप में प्रारंभ किया गया था, जिसमें 60% अनुदान और 40% ऋण के रूप में था। ऋण का भाग 5% वार्षिक की दर पर 15 वर्षों में अदा करना था। इस परियोजना को भूटानी प्रबंधन के हाथ में वर्ष 1991 में सौंप दिया गया। 336 मेगावॉट क्षमता वाली इस परियोजना से उत्पादित विद्युत का अधिकांश भारत को ही निर्यात किए जाने का प्रावधान है।
इडुक्की बांध परियोजना का निर्माण केरल राज्य में पेरियार नदी पर किया गया है। यह बांध एशिया के सबसे बड़े आर्क बांधों (Arch Dam) में से एक है। इडुक्की बांध की ऊंचाई लगभग 554 फीट है। यह बांध दो पर्वतों यथा कुरावननाला और कुराथीनाला के मध्य स्थित है। तेलुगू-गंगा परियोजना महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक राज्य की संयुक्त परियोजना है। कृष्णा नदी से जलापूर्ति प्राप्त करने वाली इस परियोजना से तमिलनाडु के चेन्नई (मद्रास) नगर को पेयजल प्रदान किया जाता है। तेलुगू गंगा परियोजना आंध्र प्रदेश में स्थित है। मेटूर परियोजना तमिलनाडु में कावेरी नदी पर है। पोचम्पाद या पोचम्पाद् परियोजना (श्रीराम सागर परियोजना) गोदावरी नदी पर निजामाबाद जनपद तेलंगाना में स्थित है। है। काल्पोंग जलविद्युत परियोजना (Kalpong Hydroelectric Power Project) अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की प्रथम जलविद्युत परियोजना है। यह काल्पोंग नदी पर स्थित है।
मयूराक्षी परियोजना से पश्चिम बंगाल एवं झारखंड दोनों राज्य लाभान्वित होते हैं। इस परियोजना के तहत झारखंड (तत्कालीन बिहार) में मयूराक्षी नदी पर ही कनाडा या मसनजोर (Massanjore) बांध निर्मित किया गया। मयूराक्षी परियोजना से 2.51 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। रिहंद परियोजना, गोविंद वल्लन पंत सागर परियोजना के नाम से भी जानी जाती है। यह उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पिपरी नामक स्थान पर रिहंद नदी पर निर्मित है। इसके तहत 934.45 मी. लंबा तथा 91.6 मी. ऊंचा बांध बनाया गया है। इस बांध के नीचे ओबरा में 300 मेगावॉट क्षमता का जलविद्युत गृह स्थापित किया गया है। इस बांध की पृष्ठभूमि में एक कृत्रिम झील गोविंद वल्लभ पंत सागर का निर्माण किया गया है। यह उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी परियोजना है।
जायकवाड़ी परियोजना गोदावरी नदी पर महाराष्ट्र में स्थित है I कालागढ़ बांध का निर्माण रामगंगा नदी पर किया गया है। इसकी ऊंचाई 128 मी. तथा लंबाई 715 मी. है। कोयना परियोजना महाराष्ट्र राज्य में कोयना नदी पर निर्मित है। है। गिरना सिंचाई परियोजना महाराष्ट्र के जलगांव जिले में गिरना नदी पर निर्मित है। तवा परियोजना मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में तवा नदी पर निर्मित की गई है। इस बांध की ऊंचाई 57.91 मी. एवं लंबाई 1815 मी. है। तवा सिंचाई परियोजना 1992-93 में पूरी हुई। तथा जल संग्रहण क्षेत्र की पश्चिमी सीना पर सतपुडा राष्ट्रीय उद्यान तथा बोरी वन्य जीव अभयारण्य स्थित हैं।
पोंग बांध (Pong Dam) का निर्माण व्यास नदी पर हिमाचल प्रदेश के दक्षिण-पश्चिम भाग पर किया गया है। इस बांध की ऊंचाई 133 मी. है। इस बांध द्वारा निर्मित जलाशय के जल का उपयोग सिंचाई एवं विद्युत उत्पादन हेतु किया जाता है। इसे ‘व्यास डैम‘ भी कहा जाता है। इस बांध के द्वारा ‘महाराणा प्रताप सागर झील’ का निर्माण हुआ है। जिसे वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है। यह भारत में स्थित अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि स्थलों में से एक है।
किसाऊ बांध (Kishau Dam) यमुना की सहायक नदी टोंस पर स्थापित किया जा रहा है। टोंस हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड की सीना से होकर प्रवाहित होती है। इस परियोजना से मुख्यतः लाभान्वित होने वाले राज्य उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश हैं। तपोवन और विष्णुगढ जलविद्युत परियोजनाएं उत्तराखंड के चमोली जिले में धौलीगंगा नदी पर स्थित हैं। मेजा बांध (Meja Dam) राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी पर निर्मित है। इस नदी का उद्गम राजसमंद जिले में देवगढ़ के निकट अरावली पहाड़ियों से होता है। कोठारी, बनास नदी की सहायक नदी है। इस परियोजना की स्थापना मुख्यतः सिंचाई हेतु की गई है।
तुलबुल नौवहन परियोजना मुख्यतः जम्मू और कश्मीर में झेलम नदी पर निर्मित की गई है। भारत इसे तूलबूल नौवहन परियोजना कहता है, जबकि पाकिस्तान वूलर बैराज। भारत ने वर्ष 1984 में वूलर झील के मुहाने पर झेलम नदी पर इस बैराज के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया था। इस परियोजना पर भारत एवं पाकिस्तान के मध्य विवाद तब उभरकर सामने आया। जब वर्ष 1987 में पाकिस्तान द्वारा इस निर्माण कार्य को वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन मानते हुए रोकने की मांग की गई। बगलिहार जलविद्युत परियोजना (Baglihar Hydroelectric Power Project) जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में चिनाब नदी पर बनाई गई है।
उकाई, गुजरात राज्य की प्रमुख बहु-उद्देशीय परियोजना है। सूरत जिले के उकाई नामक स्थान पर ताप्ती नदी पर यह परियोजना 1972 में पूरी हुई I यहीं पर 4928 मीटर लंबा तथा 68.6 मीटर ऊंचा एक विशाल बांध बनाया गया है। इससे निकलने वाली नहरों से लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। इस परियोजना के तहत 300 मेगावॉट क्षमता का एक विद्युत गृह भी निर्मित किया गया है। दमन गंगा सिंचाई परियोजना वलसाड जिला, दक्षिणी गुजरात में वापी से 30 किमी. दूर दमनगंगा नदी पर स्थित है I पाम्बा सिंचाई परियोजना पाम्बा नदी पर केरल के पट्टानामथिट्टा जिले में स्थित है। सुइल जलविद्युत परियोजना हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले में सुइल नदी पर स्थित है। सुइल रावी नदी की एक सहायक नदी है।
दुलहस्ती हाइड्रो पॉवर स्टेशन जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में चिनाब नदी पर अवस्थित है। ललितपुर में बेतवा नदी पर स्थित राजघाट बांध परियोजना को रानी लक्ष्मीबाई बांध परियोजना के नाम से जाना जाता है। गोदावरी नदी पर स्थित बभली प्रोजेक्ट (Babhli Project) महाराष्ट्र और तेलंगाना की एक अंतरराज्यीय विवादित बांध परियोजना है। महाकाली संधि भारत और नेपाल के मध्य फरवरी, 1996 में हुई थी। इस संधि द्वारा महाकाली अथवा शारदा नदी के जल के उपयोग की सीमा निर्धारित की गई। इस संधि के क्षेत्र में शारदा बैराज, टनकपुर बैराज एवं प्रस्तावित पंचेश्वर परियोजना आच्छादित हैं।
कल्पसर (Kalpasar Project) परियोजना के अंतर्गत खम्भात की खाड़ी (गुजरात) के पार एक बांध (Dam) बनाने की योजना है, जिससे ज्वारीय शक्ति (Tidal Power) उत्पन्न की जाएगी। इस योजना के तहत एक विशाल जलाशय के निर्माण की भी योजना है, जिसके ताजे जल (Fresh Water) का उपयोग कृषि, पेयजल एवं औद्योगिक प्रयोग हेतु किया जाएगा। दिसंबर, 1959 में भारत सरकार और नेपाल सरकार के बीच गंडक बैराज के निर्माण पर समझौता हुआ था। बैराज का निर्माण गंडक नदी पर वाल्मीकि नगर में वर्ष 1968-69 में किया गया I जिसका उद्देश्य नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। इसके तहत पश्चिमी नहर प्रणाली, पूर्वी नहर प्रणाली और नेपाल में एक विद्युत केंद्र हेतु जल के बंटवारे पर सहमति बनी थी।
अंतरराज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण
अंतरराज्यीय नदियों और नदी घाटियों के जल संबंधित विवादों के निपटारे के लिए संसद ने संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 को अधिनियमित किया। अधिनियम को अगस्त, 2002 में केंद्र-राज्य संबंधों पर सरकारिया आयोग की सिफारिशों के आधार पर संशोधित किया गया।
जल विवाद न्यायाधिकरण | गठन | संबंधित राज्य |
महानदी | 12 मार्च, 2018 | ओडिशा, छत्तीसगढ़ |
कृष्णा | 2 अप्रैल, 2004 [गठन की प्रभावी तिथि 1 फरवरी, 2006] | आंध्र प्रदे श, कर्नाटक, महाराष्ट्र [आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के पश्चात तेलंगाना भी] |
वंशधारा | 24 फरवरी, 2010 | ओडिशा, आंध्र प्रदेश |
महादायी/मंडोवी | 16 नवंबर, 2010 | गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र |
रावी एवं व्यास | वर्ष 1986 | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान |
गोदावरी | अप्रैल, 1969 | आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र. कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा |
नर्मदा | 6 अक्टूबर 1969 | गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान |
बहु-उद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएं | |||
नदी घाटी परियोजनाएं | खुलने का वर्ष | नदी | सम्बंधित राज्य |
भाखड़ा-नांगल बांध | 1963 | सतलज | पंजाब, हरियाणा और राजस्थान |
उकाई परियोजना | 1972 | ताप्ती | सूरत जिले में गुजरात |
दमन गंगा सिंचाई परियोजना | 2014 | दमनगंगा | वलसाड जिला, दक्षिणी गुजरात में |
सरदार सरोवर परियोजना | 2017 | नर्मदा | गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश |
इंदिरा सागर बांध | 2005 | नर्मदा | नर्मदानगर, खण्डवा जिला, मध्य प्रदेश |
ओंकारेश्वर परियोजना | 2007 | नर्मदा | मध्य प्रदेश (नवम्बर, 2007 से) |
बाण सागर बांध | सोन नदी | देवलोंद, शहडोल जिला, मध्य प्रदेश | |
सिद्रापोंग | 1897 ई. | दार्जिलिंग, भारत का सबसे पुराना जलविद्युत शक्ति संयंत्र | |
शिवसमुद्रम | 1902 | कावेरी | कर्नाटक, भारत का दूसरा सबसे पुराना जलविद्युत उत्पादन संयंत्र |
कृष्णराज सागर बांध | कावेरी | कर्नाटक | |
नागार्जुन सागर बांध | 1967 | कृष्णा | तेलंगाना, आंध्र प्रदेश |
हीराकुड बांध | 1957 | महानदी | ओड़िशा |
तवा परियोजना | 1978 | तवा | मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में |
गांधी सागर बांध | 1960 | चम्बल | मध्य प्रदेश (मंदसौर जिले में स्थित) |
राणा प्रताप सागर बांध | 1975 | चम्बल | राजस्थान |
जवाहर सागर बांध | 1972 | चम्बल | राजस्थान (कोटा) |
मेजा बांध (Meja Dam) | 1958 | कोठारी | राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में |
टिहरी बांध परियोजना | 1978 | भागीरथी | उत्तराखंड, देश का सबसे ऊंचा बांध (260.5 मी.) |
तपोवन और विष्णुगढ जलविद्युत परियोजनाएं | 2008 | धौलीगंगा | उत्तराखंड के चमोली जिले में |
पोंग बांध (Pong Dam) | 1974 | व्यास | हिमाचल प्रदेश, महाराणा प्रताप सागर झील |
किसाऊ बांध | टोंस | हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड | |
सुइल जलविद्युत परियोजना | सुइल | हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले में | |
मैथॉन बांध | 1957 | बराकर | |
बेलपहाड़ी बांध | बराकर | ||
तिलैया बांध | 1953 | बराकर | कोडरमा जिले |
कोनार बांध | 1955 | कोनार | हजारीबाग जिले |
पंचेत हिल बांध | धनबाद जिले (झारखंड) | ||
चूका (Chukha) बांध परियोजना | 1974 | वांग चू / रैदक नदी | भारत और भूटान के सहयोग से |
इडुक्की बांध | 1973 | पेरियार | केरल, एशिया के सबसे बड़े आर्क बांधों (Arch Dam) में से एक |
पाम्बा सिंचाई परियोजना | 1967 | पाम्बा | केरल के पट्टानामथिट्टा जिले |
तेलुगू-गंगा परियोजना | 1977 | कृष्णा | महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक |
बभली प्रोजेक्ट | – | गोदावरी | महाराष्ट्र और तेलंगाना |
मेटूर बांध | 1934 | कावेरी | तमिलनाडु |
पोचम्पाद या पोचम्पाद् परियोजना (श्रीराम सागर परियोजना) | 1977 | गोदावरी | निजामाबाद जनपद तेलंगाना |
काल्पोंग जलविद्युत परियोजना | – | काल्पोंग | अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की प्रथम जलविद्युत परियोजना |
मयूराक्षी परियोजना | – | मयूराक्षी | पश्चिम बंगाल एवं झारखंड; कनाडा या मसनजोर (Massanjore) बांध, झारखंड |
जायकवाड़ी परियोजना | 1976 | गोदावरी | महाराष्ट्र |
कोयना परियोजना | 1964 | कोयना | महाराष्ट्र |
गिरना सिंचाई परियोजना | – | गिरना | महाराष्ट्र (जलगांव जिले में) |
रिहंद परियोजना | 1963 | रिहंद | उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पिपरी नामक स्थान पर |
राजघाट बांध परियोजना/ रानी लक्ष्मीबाई बांध परियोजना | 2006 | बेतवा | ललितपुर, उत्तर प्रदेश |
कालागढ़ बांध/ रामगंगा बांध | 1974 | रामगंगा | उत्तराखंड |
तुलबुल नौवहन परियोजना | 1984 | झेलम | जम्मू और कश्मीर में |
बगलिहार जलविद्युत परियोजना | – | चिनाब | जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में |
दुलहस्ती हाइड्रो पॉवर स्टेशन | 2007 | चिनाब | जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में |
शारदा बैराज, टनकपुर बैराज एवं पंचेश्वर परियोजना | – | महाकाली/ शारदा | भारत और नेपाल; महाकाली संधि भारत और नेपाल के मध्य फरवरी, 1996 में |